Saturday, September 29, 2012

Anant Lakshmi Sadhana Shivir and Anant Chaturdashi Ganpati Mahotsav - Nepal

Date:  29, 30 September, 2012

Venue: Thtarhutiya Gaachi, Bada No. 4, Janakpur Dham, Nepal

Organiser: Janakpur - Virender Shah, Naronder Prasah Saha 9804814480, Amar Kumar Karn 9852025515, Sanjay Thakur 9804801666, Umesh Yadav 9844039674, Shripati Tiwari, Vechan Saha, Jitender Thakur, Dr. Brijkishore Lal Das, Sunchan Yadav 9807640881, Sanjeev Jaiswal 9844124303, Rajinder Kumar Rai, Kailash Thakur, Krishna Kumar Thakur 9854024167, Lakshman Saha, Manoj Kumar Yadav, Jaikumar Saha 9724158818, Jitender Saha 9844026323, Ratan Jaiswal 9844025590, Pradeep Yadav 981584950, Sishva (Rajviraj) - Nandkishore Jha, Shrawan Kumar Saha 9804704509, Shambhu Saha 9804724836, Viratnagar - Vishal Pandey, Devpura - Kailash Thakur, Virganj - Madan Kumar Malik, Julum Khargi, Chandrashekhar Verma, Rajviraj - Narender Das 9842832621, Laukaha (Bihar) - Gagandev 8092678890, Harinarayan Yadav 06277287585, Kritinarayan 08873678066, Madhubani - Rajinder Laldas 09471649807, Darbangha - Upnand Yadav 09534798383, Sanjay Pankaj, Rajiv Singh 9470028373, Vishnupur - Dr. A.K. Singh 8986027214, Vineet Shri 993472924, Devdhar - Mukutmani Sarevaar 9234534064
 

Monday, September 24, 2012

Kalsarp Mukti Diksha Mahotsav - Delhi

Date: 24, 25, 26 September, 2012

Venue: Kailash Siddhashram, 46, Kapil Vihar, Pitampura, Delhi

Phone : 011-27351006
 

Sunday, September 23, 2012

Savitri Saubhagay Sadhana Shivir - Dadar (Mumbai)

Date: 23 September, 2012

Venue: Brahmin Sewa Mandal, Bhawani Shankar Road, Near Kabutar Khana, Dadar (West), Mumbai (at a distance of only 5 minutes from Dadar Station)

Organiser: Vrindan Gupta 09819053360, Vandana Behan 773861333, R.S. Rathore 9224903539, Ravi Salve 9224415429, Santosh Ambedkar 9321339369, Neelam Behan 9930664579, Prarabdha Manjrekar 9819178778, Sushila Behan 9029039332, Sudhir Sethiya, Sunil Salve 9870629223, Ratnakar 8938657425, Chandrakant Mishra 9989660729, Nagsen Panwar 986721153, Jaiprakash Pal 9769827255, Bunty 98290568805, Natu Bhai 9320090040, Tulsi Mehto 9967163865, Hansraj 9769026451, Bapu Kamble 9619605053, Sailesh Joshi 9323775717, Sunil Singh 9987550857, Buddhiram Pandey 9819000414, Vasant Puriya 9869703251, Pritam Bhardwaj Ratnakar, Pradeep Kumar Gupta, Deepak

 

Saturday, September 22, 2012

Direct from Revered Gurudev - 4

हमे अपनी शक्ति का उपयोग दूसरों को कष्ट देने और नीचा दिखाने में नही करना चाहिए | हमे अपनी शक्ति का उपयोग वृक्ष की तरह खुद की उन्नति में करना चाहिए |

जो फलदार वृक्ष होता है वह सबसे पहले झुकता है | जी सूखी लकड़ी होती है वह ठूंठ की तरह खड़ी रहती है | शिष्य का गुरु के आगे झुकना इस बात का प्रमाण है कि उसमे प्रेम है ,श्रद्धा है ,समर्पण है |

आलस्य ,द्वेष ,क्रोध ,असत्य भाषण ये शिष्य को समाप्त कर देते है | इनसे बचना और इन पर विजय प्राप्त करना हर शिष्य का धर्म और कर्तव्य है |

एक शिष्य को चाहिए वह अपने ह्रदय को , मन को इतना शुद्ध और दिव्य बना दे जिससे गुरु उसमे स्थापित हो सकें | इतना चैतन्य बना दे कि बाहर की दूषित हवाएं उस पर असर नही कर पाएं | उस पर जीवन के विकारों का कोई प्रभाव न हो |

यह आवश्यक नही कि आप मिठाई लेकर के और फूलो का हार ले कर के गुरु से मिले | गुरु से मिले तो आपकी आँखों में प्रेम के अश्रु हो , ह्रदय गदगद हो , कंठ अवरुद्ध हो और आपका मन गुरु चरणों में समर्पित हो |

Vinayak Chaitanya Sadhana Shivir - Kalyan (Mumbai)

Date: 22 September, 2012

Venue: B-401, Devdarshan, Adeshwar Park, Near Fortis / Wokhard Hospital, Kalyan Sheel Road, Kalyan (West), Mumbai ( at a distance of only 10 minutes from Kalyan Station)

Organiser: SnehlataBehan 09321473730, Dinesh 9323139860, Anil Kumbhare 9819927898, Dr. Ravindra 9833514917, Tara 8767661887, Dr. Pathak 9423369984, Yogita Behan 9326116161, Abha Behan 749826479, Vijesh 9764641638, Vilaas Patil 9967913877, Kajal Jagyaasi 9324535295, Roshan 9987560823, Vipul 9673211595, Amesh Lotleekar 9029768706, Vinod Nihlaani 9326032196, Bharat Bhoir 9220710958, Dilip Ahuja 9004608536, Rajinder Binwaani 9272733722, R.P. Maurya 9768277425, Uttam 9869517721, R.K. Sharma 9029771920, Sarvesh Nikhare 9967915995, Parveend Pathak 9720178460, Ravi Patil 9029768153, B.K. Pandey 9320880871, Rachna Srivastav

Direct from Revered Gurudev - 3

अपने गुरु के स्वरूप को , अपने इष्ट के स्वरूप को देखने के लिए तुम्हे अपने मन पर चढ़ी मैल की परते हटानी पड़ेगी | जब तक तुम्हारा मन साफ नही होगा तब तक तुम गुरु को सही रूप में देख ही नही पाओगे | जैसे मुहं देखने का शीशा होता है ,उस पर रोज थोड़ी -थोड़ी धूल की परत रोज चढ़ती रहती है , जिसे रोज साफ़ करना पड़ता है | अगर कई दिनों तक शीशे पर चढ़ी धूल साफ़ नही की जाए तो आप को अपना चेहरा उसमे साफ़ नही दिखेगा | अगर आप चाहते हो आपको शीशे में आपका चेहरा साफ़ दिखे तो आपको शीशा रोज साफ़ करना पडेगा | उसी तरह तुम्हारे मन पर भी रोज मैल की परत चढ़ती रहती है क्योकि तुम्हे रोज कभी किसी बात पर झूठ बोलना पड़ता है , कभी तुम छल करते हो ,जिससे तुम्हारा मन दूषित हो जाता है | इस मन को साफ़ करने की क्रिया है ज्यादा से ज्यादा गुरु मंत्र का अजपा जप किया जाए , गुरु सेवा , गुरु संपर्क में रहा जाए ताकि मन पर जमी धूल समाप्त हो सके |

जाने अनजाने में असत्य भाषण , छल , पाप हो सकते है जिसका फल भोगना ही पड़ता है | जब भी आप गुरु चरण स्पर्श करें या गुरु साक्षात नही हो तो जब भी गुरु पूजन करें तो मन से आप अपने दिन भर किये छल , झूठ , कपट को उनके चरणों में समर्पित कर दें ,क्योंकि बोलने में आपको संकोच होगा की मैं कैसे कहूं | इससे आपका मन साफ़ हो पायेगा | हो सकता है बार -बार ऐसे गलती होती रही क्योंकि ये तो आपके मन के विकार है , मैं तो उन्हें साफ़ करने की प्रक्रिया में हूँ |

आप के मन में कोई तकलीफ है , उसे भी किसी और से कहने की बजाय ,चिंता करने की बजाय आप मन से अपने गुरु को समर्पित कर दें | इससे आप का मन हल्का होगा और धीरे-धीरे गुरु से जुड़ाव बढता जाएगा | ये एक तरफ़ा बात नही है गुरु भी आपको उतना याद करें जितना आप उन्हें याद करते है और एक दिन यह जुड़ाव इतना बढेगा की गुरु भी आप के बिन नही रह पायेगा, पर जरूरी है की आप की आँखों में प्रेम के अश्रु हो , ह्रदय में गुरु के लिए एक तड़फ हो , आप उनको देखे बिना रह न सकें , आपके आँखों से अश्रुधार बहने लगे | जब ऐसा होगा तब आप के शरीर से अष्टगंध प्रवाहित होने लग जायेगी | तब आप गुरु के स्वरूप को सही रूप में देख सकोगे | 

Direct from Revered Gurudev - 2

गुरु से ही समझा जा सकता है की वास्तविक आनंद क्या है और यह तुम तब समझ सकते हो जब तुम अपने आप को पूरी तरह गुरु में समाहित कर दो और गुरु को पूर्ण रूप से अपने आप में समाहित कर दो |


जिस क्षण गुरु पूर्णता से आप में समाहित हो गए उस क्षण आप को पूर्ण ज्ञान स्वयं प्राप्त हो जाएगा | उसके लिए फिर पोथिया पढने की आवशयकता नही रह जायेगी |

गुरु को केवल ह्रदय में स्थापित किया जा सकता है या आज्ञा चक्र पर स्थापित किया जा सकता है ,परन्तु इससे पहले आवश्यक है तुम स्वार्थ ,चल ,झूठ ,कपट से मुक्त हो जाओ | ये जब तक तुम्हारे अन्दर है गुरु स्थापित नहीं हो सकता गुरु से कुछ प्राप्त करने के क्रिया प्रेम और समर्पण के माध्यम से प्राप्त हो सकती है , उसके लिए कोई भौतिकता का रास्ता नही है |

गुरु को न तुम्हारा धन चाहिए न तुम्हारा ऐश्वर्य | उसे तो केवल पूर्ण समर्पण चाहिए |

गुरु जो रास्ता बताए उस पर बढ़ना बहुत कठिन कार्य है | केवल हिम्मतवान व्यक्ति ही उस पर बढ़ सकता है | गया बीता व्यक्ति पूर्ण समर्पण नहीं कर सकता | समर्पण के लिए व्यक्ति को वीर होना पडेगा , महावीर होना पडेगा |

जीवन में यह महतवपूर्ण नहीं की आपने कितना कमाया या कितना झूठ बोला या कितनी चोरी की | महत्वपूर्ण यह है की आप गुरु के बताये रास्ते पर कितना चले , कितना गुरु कार्य किया , तुमने अँधेरे में कितने दीपक जलाए |

मैं तुम्हारा हाथ पकड़ने को तैयार हूँ , यह मेरे जिम्मेवारी है की मैं तुम्हे सही रास्ते पर पकड़कर अग्रसर करूं | मैं ऐसा करूंगा ही ,यह मेरा धर्म है और मेरे बताए रास्ते पर चलकर ही आप पूर्णता तक पहुँच पायेंगे , अद्वितीय बन पायेंगे |

केवल चरण स्पर्श करके फूलो का हार पहनाने से कुछ नहीं होगा | गुरु जिस मार्ग पर ले जाकर आपको खड़ा करें उसपर आप अग्रसर हो वही जीवन की श्रेष्ठता है , उच्चता है |

Direct from Revered Gurudev - 1